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Baba Ramdev Yoga in Hindi – बाबा रामदेव योगा टिप्स

Baba Ramdev Yoga Asanas Tips in Hindi

Baba Ramdev Yoga in Hindi

देश विदेश में आज योग को अलग पहचान मिली हैं। इस पहचान को दिलाने के हक़दार हैं, योग गुरु बाबा रामदेव। बाबा रामदेव हमारे देश की जानी मानी हस्ती हैं, और इन्हें आध्यात्म गुरु के नाम से भी जाना जाता हैं। रामदेव बाबा ने हमें विदेशी चीजे त्यागकर स्वेदशी चीजो का इस्तेमाल करना सिखाया।

 

आजकल वातावरण में बढ़ते प्रदुषण के कारण अनेक नयी नयी बीमारियां जन्म ले रही हैं। योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसार अगर हम दैनिक रूप से अपने जीवन में योग करे, तो हम सभी प्रकार की बीमारियों से बचे रह सकते हैं। जो लोग योग करते हैं, वो कभी बीमार नहीं होते। योग करने से हम केवल बीमारियों से ही नहीं बचते, अपितु हम पूरी तरह से स्वस्थ जीवन भी जीते हैं। योग करने से मन को शांति मिलती हैं, और चेहरे पर चमक आती हैं।

आज हम अपनी पोस्ट में रामदेव बाबा रोग आसान (Ramdev Baba Yoga Asanas) के बारे में बतायेगे। रामदेव बाबा के ये योग आप रोजाना करे। इन योग को करने से आप स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। तो आइये जाने Baba Ramdev in Hindi के बारे में।

कपालभाति प्राणायाम (kapalbhati Pranayama) – कपालभाति दो शब्दो से बना हैं, कपाल और भाति। कपाल का अर्थ हैं माथा और भाति का अर्थ हैं चमक। अर्थात कपालभाति प्राणायाम करने से आपके माथे पर तेज उत्तपन होता हैं। इस तेज के कारण आप से सभी बीमारियां दूर रहती हैं।

कपालभाति प्राणायाम (kapalbhati Pranayama) करने की विधि –

1. इस आसान को करने के लिए सुबह के समय साफ़ स्थान पर साफ़ कपडा बिछाकर बैठ जाये।
2. अब आप इस कपडे पर आसान लगाकर बैठ जाये।
3. अब अपने पेट को अंदर की तरफ धक्का देते हुए नाक से सांस बाहर की ओर छोड़े।
4. अब जब तक हो सके यह किर्या करते रहे।
5. आप कम से कम शुरुरात में 10 बार यह किर्या करे, उसके बाद इसे बढ़ाते रहे।

कपालभाति प्राणायाम (kapalbhati Pranayama) में सावधानिया –

1. यह आसान सुबह खाली पेट करे।
2. इस आसान को करने के कम से कम आधे घंटे बाद तक कुछ ना खाये।
3. शुरुरात में यह आसान की अच्छे योग गुरु के संपर्क में ही करे।
4. अगर कपालभाति करते समय आपका जी मिचलाने लगे या चक्कर आने लगे तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करे।

कपालभाति प्राणायाम (kapalbhati Pranayama) से लाभ –

1. जिन लोगो का पेट बाहर निकला हैं, वो ये कपालभाति जरूर करे। कपालभाति करने से पेट की चर्बी कम हो जाती हैं, और पेट सामान्य हो जाता हैं।
2. कपालभाति करते समय पसीने के माध्यम से शरीर की सारी गन्दगी बाहर निकल जाती हैं।
3. जो लोग वजन घटाना चाहते हैं, वो लोग यह आसान जरूर करे। इस आसान से कई लोगो ने अपना वजन कम किया हैं।
4. कपालभाति करने से सोचने और याद करने की शक्ति बढ़ती हैं।
5. अगर आप कब्ज और गैस की समस्या से परेशान हैं, तो ये योग आपकी समस्या का निदान करेगा।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom Pranayam ) – अनुलोम-विलोम प्राणायाम को नाड़ी शोधक भी कहा जाता हैं। इस प्राणायाम में कई बार सांस लेने और छोड़ने की किर्या की जाती हैं। इस किर्या से फेफड़ो में ताजी और शुद्ध हवा जाती हैं। रोजाना इस प्राणायाम को करने से शरीर और दिमाग स्वस्थ रहता हैं।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom Pranayam ) करने की विधि –

1. इस आसान को करने के लिए खुले वातावरण में साफ़ कपडा बिछाकर उसके ऊपर सुखासन में बैठ जाये।
2. अब अपनी आँखों को बन्द करते हुए अपने दोनों हाथो को अपने घुटनो पर रखे।
3. अब दायें हाथ के अँगूठे से नासिक के दायें छेद को बन्द करे।
4. अंगूठे के पास वाली दो अंगुलियों को बिच में रखे।
5. अब अपनी नासिक के बायें छेद से अंदर की तरफ सांस खिंचे।
6. अब बिच में रखी दोनों अंगुलियों से नासिक के बाएं छेद को बन्द करे और दायें छेद से अंगुली हटा ले।
7. अब नासिक के दायें छेद से सांस बाहर की तरफ फेखे।
8. इस प्राणायाम को रोजाना कम से कम 15 मिनट करे।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom Pranayam ) में सावधानिया –

1. जब हम सांस लेने और छोड़ने की किर्या करते हैं, तब इस किर्या को करते समय कोई आवाज नहीं होनी चाहिए।
2. जिन लोगो में खून की कमी हैं और वो कमजोर हैं, ऐसे लोग ये आसान ना करे।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom Pranayam ) करने से लाभ –

1. इस प्राणायाम को नाड़ी शुद्ध प्राणायाम भी कहा जाता हैं, क्योंकि इस प्राणायाम से नाड़ियों की शुद्धि होती हैं।
2. यह आसान आपकी नकारात्मक सोच को ख़त्म करके सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता हैं।
3. इस आसान को रोजाना करने से तनाव कम होता हैं।
4. जिन लोगो को गुस्सा अधिक आता हैं, और वो गुस्से में रहते हैं, उन्हें इस योग से लाभ होता हैं।
5. रोजाना अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने से आँखों की रौशनी बढ़ती हैं।

बाह्य प्राणायाम (Bahya Pranayama) – बाह्य प्राणायाम में सांस बाहर छोड़ने की किर्या की जाती हैं, इसीलिए इस प्राणायाम को बाह्य प्राणायाम कहते हैं। यह रोग करने से शरीर स्वस्थ रहता हैं। कपालभाति प्राणायाम के बाद ही बाह्य प्राणायाम किया जाता हैं।

बाह्य प्राणायाम (Bahya Pranayama) करने की विधि –

1. इसके लिए स्वछ स्थान पर आसान लगाकर बैठ जाये।
2. अब अपने फेफड़ो को फुलाते हुए अपने पेट को अंदर की तरफ ले जाये।
3. अब अपने पेट पर जोर देते हुए तेजी से सांस बाहर की ओर फेकते जाये।
4. अब अपनी ठोड़ी को अपनी छाती लगाने की कोशिश करे।
5. अब अपने पेट को दबाकर सांस बाहर निकाले।
6. इस स्थति में में जितनी देर बने।
7. इस किर्या को रोजाना कम से कम 5 बार करे।

बाह्य प्राणायाम (Bahya Pranayama) में सावधानिया –

1. शुरू में यह प्राणायाम किसी अच्छे योग गुरु की जानकारी में ही करे।
2. इस योग को सुबह खाली पेट करे। ध्यान रहे अगर आप यह योग खाना खाने के बाद कर रहे हैं, तो खाने के 5 से 6 घण्टे बाद यह योग करे।
3. ब्लड प्रेशर के रोगी यह प्राणायाम ना करे।
4. प्रेग्नेंसी और पीरियड्स के दौरान ये प्राणायाम ना करे।

बाह्य प्राणायाम (Bahya Pranayama) से लाभ –

1. यह प्राणायाम रोजाना करने से पेट से जुडी सभी बीमारियां दूर हो जाती हैं।
2. जो रोग मधुमेह के शिकार हैं, उनके लिए यह योग लाभकारी हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम ( Bhastrika pranayama) – भस्त्रिका प्राणायाम में तेजी से सांस लेने और दुगनी तेजी से सांस छोड़ने की किर्या की जाती हैं। इस इंसान को करने से शरीर मजबूत रहता हैं, इसीलिए युवाओ के लिए यह भस्त्रिका प्राणायाम बहुत उपयोगी हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम ( Bhastrika pranayama) कैसे करे –

1. इस आसान को करने के लिए सुखासन की स्थिति में बैठ जाये।
2. आसान में बैठने के बाद अपने शरीर को पूरी तरह सीधा रखे और मुँह भी बन्द रखे।
3. अब नासिका के दोनों छिद्रों से आवाज करते हुये सांस अंदर ले और फिर आवाज करते हुये ही आवाज बाहर फेंके।
4. ध्यान रहे सांस अंदर खीचने और बाहर फेंकने की किर्या तेज होनी चाहिए।
5. सांस खीचने और बाहर फेंकने की किर्या के दौरान छाती स्थिर होनी चाहिए और पेट हिलना चाहिए।
6. इस किर्या को कम से कम 15 बार जरूर करे।
7. सांस अंदर खीचने और बाहर फेंकने की स्थति में समय समान होना।

भस्त्रिका प्राणायाम ( Bhastrika pranayama) में सावधानी –

1. इस प्राणायाम को खुले वातावरण में करे। इससे प्राणायाम करने का अच्छा लाभ होगा।
2. पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के दौरान यह भस्त्रिका प्राणायाम ना करे।
3. हर्निया, दिन से जुड़े रोगी, अल्सर और मिरगी के मरीज ये प्राणायाम ना करे।
4. जिन लोगो के पथरी की प्रॉब्लम हैं, वो लोग ये योग ना करे।
5. गर्मियों के दिनों में यह प्राणायाम केवल सुबह के समय करे।

भस्त्रिका प्राणायाम ( Bhastrika pranayama) से लाभ –

1. रोजाना यह प्राणायाम करने से फेफड़ो की कार्य करने की क्षमता बढ़ती हैं।
2. इस आसान को करने से पेट की चर्बी कम हो जाती हैं, और वजन भी घटने लगता हैं।
3. इस प्राणायाम को करने से पाचन शक्ति में सुधार होता हैं।
4. टीबी और अस्थमा के मरीजो को यह प्राणायाम करने से लाभ होता हैं।

भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama) – आजकल इंसान के जीवन में तनाव इतना बढ़ गया हैं, कि दिमाग को जरा भी शान्ति नहीं मिल पाती। दिमाग को केवल प्राणायाम के माध्यम से शांत किया जा सकता हैं। दिमाग को केवल तभी शांत रह सकता हैं, जब दिमाग में आने वाले नकारात्मक विचारो पर काबू किया जाये। इसी के लिए भ्रामरी प्राणायाम किया जाता हैं। भ्रामरी प्राणायाम करने से आप अपने दिमाग को शांत रख सकते हैं। जिससे आपके काम भी सही प्रकार से होंगे और आपको गुस्सा भी नहीं आएगा। भ्रामरी प्राणायाम का सबसे मुख्य गुण यह हैं, कि इसे किसी भी समय किया जा सकता हैं।

भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama) करने की विधि –

1. खुले वातावरण में चटाई बिछाकर उसपे आसान लगाकर बैठ जाये।
2. अब अपने हाथो को कंधो के सीध में फैलाये।
3. अब दोनों हाथो को मोडकर कानो के पास लाये और दोनों हाथो के अंगूठो से कानो को बन्द कर ले।
4. अब अपने दोनों हाथो की अनामिका, कनिष्का और मध्यमा अंगुलियां अपनी आँखों पर रखे और दोनों हाथो की तर्जनी अंगुली अपने माथे पर।
5. ध्यान रहे इस स्तथि में आप बिलकुल सीधे बैठे रहे।
6. अब सांस अंदर लेने और बाहर छोड़ने की प्रकिर्या को दोहराये।
7. सांस छोड़ने का समय सांस लेने के समय से दुगना होना चाहिए। अर्थात अगर सांस लेने का समय 10 सेकंड हैं, तो सांस छोड़ने का समय 20 सेकंड होना चाहिए।
8. सांस छोड़ने समय भ्रमर की आवाज आनी चाहिए।

भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama) में सावधानियां –

1. प्राणायाम करने का समय धीरे धीरे बढाये। शुरुआत में ही अधिक समय तक यह प्राणायाम ना करे।
2. कान में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।

भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama) करने से लाभ –

1. दिमाग शांत करने के लिए यह प्राणायाम सबसे अधिक उपयोगी हैं।
2. इस प्राणायाम को रोजाना करने से स्मरण शक्ति बढ़ती हैं।
3. इस प्राणायाम को करने से गुस्सा, तनाव, चिंता आदि सभी मानसिक रोग दूर हो जाते हैं।
4. इस प्राणायाम को करने से आप सकारात्मक सोचने लगते हैं।

योग से होने वाले लाभ (Baba Ramdev Yoga Benefits in Hindi)

योग से अनेक लाभ होते हैं। दवाई खाने से रोग ठीक हो जाता हैं, लेकिन अगर आप रोजाना योग करेगे, तो आपको कभी कोई रोग ही नहीं लगेगा। अब ये आपके ऊपर डिपेंड करता हैं, कि आप रोगी होना पसंद करेगे या निरोगी। हम आपको बाबा रामदेव के योग से होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

1. योग करने से दिल से जुडी सभी बीमारियां दूर हो जाती हैं।
2. योग करने से रक्त शुद्ध होता हैं, और रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ती हैं।
3. योग करने से आपके ध्यान लगाने के शक्ति बढ़ती हैं।
4. रोजाना योग करने से फेफड़ो की कार्य करने की क्षमता बढ़ती हैं, इसीलिए जो लोग लंबा जीवन जीना चाहते हैं, वो रोजाना योगासन जरूर करे।
5. योग करने से हाई और लो दोनों प्रकार के ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल में आ जाते हैं।
6. योग करने से दिमाग और मन दोनों शांत रहते हैं। जिससे मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती हैं।
7. दिमाग तेज करने और स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए भी रोजाना योग करना चाहिए।
8. योगासन से दिमाग शांत होने के कारण नींद भी अच्छी आती हैं। जिसके कारण आपका पूरा दिन अच्छा गुजरता हैं।

दोस्तों आज हमने आपको बाबा रामदेव योग टिप्स (Baba Ramdev Yoga Tips) के बारे में जानकारी दी। हमें उम्मीद हैं, हमारी यह जानकारी आपके लिए लाभकारी होगी। बाबा रामदेव के योगासन (Baba Ramdev’s Yogasana) के बारे में जानकरी आपको कैसी लगी हमें कमेंट के माध्यम से जरूर बताये।

Disclaimer: All information are good but we are not a medical organization so use them with your own responsibility.

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