HomeHealth Tips in Hindi

नवजात की देखभाल के टिप्स – Newborn Baby Care Tips in Hindi

नवजात बेबी केयर टिप्स इन हिंदी

Best Hindi Tips for Baby Care – नौ महीने बचे को पेट में रखने और असहनीय प्रसव पीड़ा सहने के बाद जब बच्चा माँ की गोद में आता है, माँ की खुशियों का कोई ठिकाना नहीं रहता| यह एक औरत के जीवन सबसे खूबसूरत पल और खुशनुमा एहसास होता है| बच्चे की किलकारियां सुनकर माँ ख़ुशी से झूमने लगती है| माँ बनने के बाद महिला को ख़ुशी के साथ साथ बहुत सारी जिम्मेवारियां भी मिलती है|

Baby Care Tips in Hindi

जो महिलाएं पहली बार माँ बनती है, उनको बच्चे का ध्यान कैसे रखे, इन सब बातो की कोई जानकारी नहीं होती| ऐसे में एक अच्छी माँ की सभी जिम्मेवारियां निभाने में उन्हें थोड़ी कठिनाई होती है| छोटे बच्चे को गोद में कैसे ले, बच्चे को दूध कैसे पिलायें, बच्चे को कैसे नहलाएं ये कुछ ऐसी जिम्मेवारियां है, जिनको बहुत ध्यान से निभाना पड़ता है| जब तक बच्चा पांच साल का नहीं हो जाता, तब तक तो इन सभी कामो को करने में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है|

अगर आप पहली बार माँ बनी है और अपने नवज़ात बच्चे की देखभाल कैसे करे, इसके बारे में आपको कुछ भी जानकारी नहीं है, तो आप हमारा आज का ये हेल्थ रिलेटेड आर्टिकल पढ़े| इस पोस्ट में हम आपको छोटे और नवजात बच्चो की देखभाल के कुछ सरल और सुरक्षित तरीको के बारे में बताने जा रहे है| आइये जाने नवजात बच्चो की देखभाल के कुछ टिप्स|

शिशु देखभाल करने के टिप्स (Baby Care Tips in Hindi Language)

नवजात शिशु को कैसे पकड़े – नवजात बच्चे को पकड़ते और संभालते समय बहुत सावधानी बरतने की जरुरत पड़ती है| बच्चे को इस प्रकार से अपनी गोद में उठाये कि बच्चे का सिर और गर्दन आपके हाथ के नीचे सही से हो| बच्चे को गोद में लेने पर उसकी गर्दन और सिर को सही सपोर्ट मिलना बहुत जरुरी है| सही तरीके से अगर बच्चे को गोद में ना लिया जाये या उसकी गर्दन और सिर का पूरा सपोर्ट ना दिया जाये, तो बच्चे की गर्दन में झटका आ सकता है| ऐसे में बच्चे को पूरी सावधानी के साथ गोद में पकड़ना चाहिए|

नवजात शिशु को गोद में कैसे ले – जब बच्चा पैदा होता है, तब बच्चे की स्किन बहुत नाजुक और मुलायम होती है, ऐसे में कई बार बच्चे को गोद में लेने से थोड़ा डर लगता है| आपको ऐसा लगता है, जैसे अगर आप बच्चे को गोद में लेंगे तो प्रॉब्लम हो जाएगी, लेकिन डरे नहीं| बच्चे को गोद में लेने का सही तरीका अपनाये|

1. छोटे बच्चे को संक्रमण जल्दी हो जाता है| ऐसे में अपने बच्चे को गोद में लेने से पहले आप अपने हाथ एंटी-सेप्टिक सेनेटाइजर लिक्विड से धोएं| जिससे आपके हाथ में मौजूद सभी बैक्टीरिया नष्ट हो जायेगे, और बच्चे को किसी प्रकार का संक्रमण होने का खतरा नहीं रहेगा|

2. बच्चे के सिर और गर्दन को सपोर्ट देते हुए बच्चे को गोद में उठायें| अपना एक हाथ बच्चे के पैरो के नीचे रखे और दूसरा हाथ बच्चे के सिर और गर्दन के नीचे रखे| इस प्रकार से पकड़ने से बच्चे के पुरे शरीर को आराम मिलेगा और बच्चे को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी|

नवजात बच्चे को आराम कैसे दे और कैसे सुलाएं – नवजात बच्चे को आराम की बहुत जरूरत होती है| 3 महीने का बच्चा 18 से 20 घंटे तक सो सकता है| 3 महीने के बाद बच्चे की नींद सामान्य 8 से 10 घंटे की हो जाती है|

1. अगर आपका बच्चा लम्बे समय तक सो रहा है, तब भी आपको अपने बच्चे को तीन से चार घंटे के अंतराल पर स्तनपान कराना चाहिए| नवजात बच्चे बोल नहीं सकते, ऐसे में आपकी जिम्मेदारी बनती है, कि समय समय पर बच्चे को स्तनपान कराये, जिससे बच्चे का पेट भरा रहे और वो आरामदायक नींद ले सके|

2. बच्चे के सिर के नीचे हल्का और मुलायम तकिया लगाएं| ध्यान रहे बच्चा एक टी साइड में सिर रखकर लम्बे समय तक ना सोएं| लम्बे समय तक एक ही साइड में सिर रखकर सोने से बच्चे के सिर के आकर में प्रॉब्लम हो सकती है| इसके साथ ही बच्चे को SIDS का खतरा भी हो सकता है| अपने आप बच्चे के सिर की पोजीशन को कुछ कुछ समय बाद बदलते रहे|

3. नवजात बच्चे को रात और दिन के बारे में कोई जानकारी नहीं होती| ऐसे में कई बच्चे पुरे दिन सोते है, और रात में जागते है| बच्चे के रात में जागने से माता पिता को बहुत परेशानी होती है और साथ ही रात में अधिक जागना बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा नहीं है| अगर आप बच्चा दिन में अधिक सोता है, तो दिन में उसे हल्के हाथो से थपथपा कर जगाएं| बच्चे के साथ बाते करे, बच्चे के साथ खेले| ऐसा करने से बच्चा दिन में कम सोयेगा, जिससे बच्चे को रात में अच्छी और गहरी नींद आयेगी|

नवजात बच्चे को स्तनपान कैसे कराये – नवजात बच्चे को जन्म के बाद से 6 महीने तक माँ के दूध को पीने की जरुरत होती है| माँ का दूध बच्चे के विकास के लिए सबसे संतुलित और पौष्टिक आहार माना जाता है| माँ के दूध में सभी प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते है, जो बच्चे के विकास के लिए बहुत जरुरी होते है| अगर आपको दूध आता है, तो 6 महीने तक बच्चे को अपना दूध ही पिलायें| आजकल महिलाएं स्तनपान करना पसंद नहीं करती, जिसके कारण बच्चे के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है|

1. स्तनपान कराने के लिए बच्चे को अपनी दोनों बाजुओं के माध्यम से गोद में उठायें और बच्चे को अपने नजदीक लाये| अपने अपने स्तन के निप्पल को बच्चे के होठ से लगाए बच्चे को दूध पिलायें|

2. अगर आपका बच्चा आपका दूध पीता है, तो आपको अपने खाने पीने पर विशेष ध्यान देना चाहिए| स्तनपान कराने के दौरान किसी भी उल्टी सीधी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए| स्तनपान कराने वाली महिलाओं को दाल और पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करना चाहिए| इससे आपके स्तन में अधिक दूध बनेगा, जिससे आपके बच्चा का पेट भर जायेगा|

3. कई बार प्रसव के बाद महिलाओं के स्तन में दूध नहीं आता| स्तन में दूध ना आये, तो घबराये नहीं और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे| अपने आहार में पोषक तत्वों को शामिल करे| ऐसा करने से एक दो दिन में ही आपके स्तनों में दूध आने लगेगा|

4. स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्तनों की साफ़ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए| रोज नहाते समय स्तनों की अच्छे से सफाई करे| बच्चे को दूध पीलाने के बाद स्तनों की अच्छी तरह सफाई करे और उन्हें सुखाने के बाद ही ढके|

बच्चे को बोतल फीडिंग कैसे कराये – जन्म के 6 महीने तक बच्चो को माँ का दूध ही पिलाना जाना चाहिए, लेकिन कई बार माँ के स्तनों से दूध ना आने या अन्य किसी कारण की वजह से बच्चे को बोतल फीडिंग की आदत डालनी पड़ती है| पाउडर वाला दूध बनाने से पहले इसकी सही मात्रा और बनाने के सही तरीके के बारे में जानकारी होनी चाहिए| गलत तरीके से बोतल फीडिंग कराने से बच्चे को परेशानी हो सकती है| बोतल फीडिंग कराने से पहले कुछ बातो की जानकारी होना जरुरी है|

1. बोतल को गर्म पानी से अच्छी तरफ धोना चाहिए| गर्म पानी से बोतल की अच्छी तरह सफाई हो जाती है| बोतल की सफाई ना होने और गलत मात्रा में पाउडर का इस्तेमाल करने से आपका बच्चा बीमार हो सकता है|

2. जब जब बच्चे को भूख लगे, तब तब बच्चे को बोतल फीडिंग कराएं| छोटे बच्चे बोल नहीं सकते, ऐसे में उनको भूख कब लगती है, आपको इस पर ध्यान देना होगा| अगर आपको यह समझ नहीं आता, तो भी तीन से चार घंटे बाद बच्चे को बोतल फीडिंग कराते रहे|

3. एक ही दूध को दोबारा ना पिलाये| जब भी बच्चे को बोतल फीडिंग करानी हो, तो नया दूध बनाये| बच्चे को फ्रीज़ में रखा ठंडा दूध ना पिलायें|

बच्चे को डायपर कैसे पहनाएं – आप बच्चे को चाहे कपड़े का डायपर पहनाये या डिस्पोजेबल डायपर ये बात आप पर निर्भर करती है. लेकिन बच्चे की सही देखभाल और डायपर पहनाने का सही तरीका आपको आना चाहिए| सही समय पर डायपर ना बदलने और साफ सफाई ना रखने के कारण शिशु को अनेक प्रकार की परेशानियां होने लगती है|

1. अगर आप बच्चे को डिस्पोजेबल डायपर पहना रही है, तो हर तीन से चार घंटे बाद आपको डिस्पोजेबल डायपर चेंज करते रहना चाहिए| डायपर चेंज ना करने से डायपर में पेशाब भर जायेगा, जिससे बच्चे को संक्रमण होने का खतरा बढ़ जायेगा| बच्चे का पेट खराब होने पर डायपर जल्दी जल्दी बदल देना चाहिए|

2. अगर आप कपडे का डायपर इस्तेमाल कर रहे है| तो यह डायपर पूरी तरह साफ़ होना चाहिए| कपडे के डायपर को संक्रमण से बचाने के लिए इसको गर्म पानी में एंटी सेप्टिक लिक्वड डालकर इसकी सफाई करनी चाहिए| हर तीन घंटे में डायपर बदलते रहना चाहिए, और डायपर पहनाने से पहले बच्चे की जैतून के तेल से मालिश करनी चाहिए|

बच्चे को नहलाने का तरीका – बच्चे के जन्म के बाद एक हफ्ते तक बच्चे को किसी साफ़ सूती कपडे से हल्के हाथो से पोछकर बच्चे के शरीर को साफ़ करे| बच्चे के नाभि-नाल के घाव सूखने के बाद बच्चे को हफ्ते में दो से तीन बार नहलाएं| गर्भ से ही बच्चा नाभि-नाल लेकर आता है| जन्म के बाद इसे काटा जाता है और इसका घाव सूखने में समय लगता है|

1. बच्चे को नहलाने के लिए बहुत अधिक गर्म और ठन्डे पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए| बच्चे को नहलाने के लिए हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करे| इसके साथ ही बच्चे के कानो को नहलाते समय दोनों हाथो से बंद कर ले, ताकि बच्चे के कानों में पानी ना जा पाएं|

2. नहलाने के तुरंत बाद बच्चे को साफ कपडे में लपेट ले और बच्चे का शरीर पोछकर तुरंत बच्चे को कपडे पहना दे| ध्यान रहे बच्चे को ज्यादा देर बिना कपडे के ना रखे और बच्चे का बदन पोछने के लिए मुलायम तौलिया का इस्तेमाल करे|

3. बच्चे को पहली बार अकेले ना नहलाएं| इस समय अपने साथ किसी बुजुर्ग महिला को रखे, जिसे बच्चे नहलाने आते हो| बच्चे को नहलाने के लिए माइल्ड क्रीम सोप या शैंपू का ही इस्तेमाल करे|

शिशु को डॉक्टर को दिखाते रहे – अगर आप अपने बच्चे की अच्छी सेहत चाहती है और बच्चे को हर बीमारी से बचाना चाहती है, तो अपने बच्चे को जन्म के एक साल तक हर महीने दो से तीन बार डॉक्टर को दिखाते रहे| अगर आपको अपने शिशु में कुछ अजीब हरकत नजर आ रही है, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे|

इस पोस्ट में आपने नवजात बच्चे की देखभाल के घरेलू तरीको को जाना| अगर आप माँ बनने वाली है, या माँ बन चुकी है, तो आपको बच्चे की देखभाल कैसे करे, इसके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए| आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी, हमें कमेंट करके बताएं| कमेंट करने के लिए पोस्ट के निचे बने कमेंट बॉक्स में जाये| अगर आप इस पोस्ट के बारे में अपना कोई सवाल पूछना चाहती है, या किसी अन्य विषय पर हमसे जानकारी चाहती है, तो उसके बारे में भी हमें कमेंट करके बता सकती है|

Disclaimer: All information are good but we are not a medical organization so use them with your own responsibility.

Comments (0)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

10 − 9 =

error: Content is protected !!