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भगवान का नाम God Spiritual Stories in Hindi

Spiritual Hindi Kahani

God Spiritual Stories in Hindi

पुराने समय की बात हैं, श्याम नाम का एक व्यक्ति गांव गांव जाकर सब्जी बेचा करता था। वह सब्जी बेचते समय हर किसी को भगवान बोलता। जैसे अगर उससे कोई पूछता – भईया आलू कैसे दिये ? तो वो बताता भगवान 20 रूपये किलो। उससे कोई पूछता गाजर कैसे दी ? तो वो बोलता भगवान 30 रूपये किलो। धनिया कैसे दिया ? भगवान एकदम ताजा धनिया हैं 10 रूपये किलो। भगवान मानो उसकी जबान पर हर टाइम रहता।

वह सबको भगवान कहता, इसीलिए लोगो भी उसे भगवान कहने लगे। उसे भगवान बोलने और सुनने में बड़ा अच्छा लगता। गांव की एक औरत भगवान की बहुत बड़ी भक्त थी, उस औरत को यह बात अच्छी नहीं लगती। उसे लगता जैसे वह भगवान का अपमान कर रहा हो।

एक दिन उस औरत ने उस सब्जी वाले को बुलाया और उससे गुस्से में पूछा – तुम सबको भगवान कहकर क्यों बुलाते हो ?
उस औरत की बात सुनकर वह सब्जी वाला बोला – “भगवान” मैं आपके जैसे अधिक पढा लिखा नहीं हूँ, मैं केवल थोड़ा बहुत ही जानता हूँ।

पहले गांव में माँ बाप के साथ खेत में मजदूरी करता था। एक दिन हमारे गाव में एक महात्मा जी सत्सग करने आये। मैं भी उस सत्संग में गया। उन्होंने उस सत्संग में बहुत सी बाते बताई। जिनमे से एक भी बात मुझे समझ नहीं आयी, लेकिन एक बात मुझे समझ आयी और मैंने उसकी गांठ बांध ली।

महात्मा जी ने बताया कि हर एक इंसान के अंदर भगवान होता हैं, बस जरुरत होती हैं, जरूर होती है उसे ढूंढने की। क्या पता किस इंसान में तुम भगवान ढूंढ लो, और फिर तुम्हारे जीवन का उद्धार हो जाये। उनकी यह बात मुझे बहुत अच्छी लगी। उस दिन मुझे लगा जैसे वास्तव में भगवान मेरे अंदर हैं, सामने वाले के अंदर हैं, सबके अंदर हैं।

मैंने उसी दिन से सबको भगवान बोलना शुरू कर दिया, और वास्तव में मेरा जीवन बदल गया। अब मुझे किसी में कोई कमी नजर नहीं आती। जिन लोगो से पहले नफरत करता था, उनमे भी मुझे भगवान नजर आने लगा। किसी की वाणी में भगवान मिलता हैं, तो किसी की मुस्कान में भगवान दिखता हैं। अब तो मुझे सब जगह भगवान दिखता हैं। हर नर में नारायण हैं, और नारायण ही नर के रचयिता हैं।
उस सब्जी वाले की बात सुनकर उस औरत का सर शर्म से नीचे झुक गया।

दोस्तों जीवन की वास्तविकता यही हैं, और हम इसी वास्तविकता से दूर भागते हैं। हम मंदिर जाते हैं, मस्जिद जाते हैं, गुरूद्वारे जाते हैं, केवल उस भगवान के दर्शन करने के लिये। लेकिन हम भगवान स्वरुप इंसान से ही नफरत किये बैठे हैं। वास्तव में भगवान मेरे अंदर हैं, आपके अंदर हैं, और संसार की हर एक वस्तु के अंदर हैं।

फूलो में भगवान हैं, खुशबु में भगवान हैं, पेड़ पौधों सब में भगवान हैं। यहाँ तक की उन निर्दोष जानवरो में भी भगवान हैं, जिनको इंसान आज अपनी जीभ के स्वाद के लिये खा जाता हैं। नर ही नारायण हैं, यह बात पुराणों और वेदों में कही गयी हैं।

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