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शिक्षाप्रद कहानियों – Long Moral Stories in Hindi For Kids

Online Moral Stories in Hindi

Online Moral Stories in Hindi

पुराने समय की बात हैं, एक बार एक प्रसिद्ध महात्मा अपने कुछ शिष्यो के साथ भ्रमण कर रहे थे। उस समय यातायात का कोई साधन नहीं होता था, सब पैदल ही यात्रा किया करते थे।

भ्रमण करते करते रास्ते में महात्मा जी को प्यास लगने लगी। प्यास के मारे उनका गला सूखा जा रहा था, लेकिन वहाँ दूर दूर तक कोई गाँव नहीं था, जहाँ जाकर पानी लाया जा सके। उनमे से एक शिष्य पानी की तलाश में गया। उसने देखा पास में ही एकनदी हैं, और उस नदी में कुछ लोग कपडे धो रहे थे। वह उस नदी के निकट गया तो उसने देखा कि नदी का पानी बहुत गन्दा और मलिन हैं। महात्मा जी के लिए गन्दा पानी ले जाना सही नहीं होगा ऐसा सोचकर वह बिना पानी लिए ही वापिस लौट आया।

ऊधर महात्मा जी का प्यास से बुरा हाल था। शिष्य ने आकर सारी बात बताई। तब एक दूसरा शिष्य पानी लेने गया। वह उस नदी के पास गया, तो उसने देखा उसका पानी गन्दा हैं, क्योंकि उस नदी में कुछ लोग कपडे धो रहे थे। वह नदी किनारे जाकर खड़ा हो गया, और कुछ देर बाद उसी नदी से महात्मा जी के लिए पानी ले गया।

महात्मा जी प्यास से व्याकुल थे, उन्होंने शिष्य के हाथ में पानी देखा तो ख़ुशी से पी लिया। वह पानी वास्तव में शुद्ध था। पानी पीकर महात्मा जी ने अपनी प्यास बुझा ली, और फिर उस शिष्य से पूछा, नदी का जल तो गन्दा था, दूर दूर था यहाँ कोई गाँव और कुआँ भी नहीं है, फिर तुम यह साफ़ पानी कहाँ से लाये।

महात्मा जी की बात सुनकर शिष्य बोला – महात्मा जी उस नदी का जल वास्तव में गन्दा था, क्योंकि उस समय नदी पर कुछ लोग कपडे धूल रहे थे। मैं नदी के पास खड़ा रहा, और जब वो कपडे धोकर चले गए, तब धीरे धीरे पानी शांत हो गया। जिससे पानी में जी बालू थी, वह निचे बैठ गयी और नदी का जल साफ़ हो गया।

महात्मा जी अपने शिष्य की बातो से खुश हुए, और उन्होंने दूसरे शिष्यो को भी यह सिख दी कि अगर सब्र से काम लिया जाए तो कोई भी कार्य करना असंभव नहीं।

दोस्तों इस कहानी में जो बात बताई गयी, वह सत्यता पर प्रमाणित हैं। जीवन में भी निरंतर सुख दुःख आते रहते हैं। कुछ लोग इन दुखो से डर जाते हैं, और घबरा कर अपना कार्य करना बन्द कर देते हैं, या फिर उल्टे पैर वापिस लौट जाते हैं, लेकिन जिन लोगो में कुछ कर गुजरने का हौसला, कुछ कर गुजरने का जूनून होता हैं, वो कभी अपने फैसले से पीछे नहीं हटते, वो सब्र रखते हैं, खुद पर भरोशा रखते हैं, और जीवन में आने वाली मुसीबतो और दुखो का सीना चीरते हुए आगे निकल जाते हैं।

अगर मनुष्य के अंदर सब्र करने का गुण हो तो वह पानी को भी एक छलनी में रोक सकता हैं, बस उसे सब्र करना होगा उस समय तक जब तक पानी बर्फ नहीं बन जाता।

आपको हमारी ये शिक्षाप्रद कहानी कैसी लगी, और आपने इस कहानी से क्या सिखा। आप हमें कहानी के नीचे बने कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताये। आपका एक एक कमेंट हमारे लिए कीमती हैं।

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