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गुस्सा Short Stories in Hindi With Moral

A Short Moral Story

A Short Moral Story

 

सोनू क्लास में पढ़ने में सबसे होशियार बालक था, लेकिन फिर भी उससे क्लास का कोई बच्चा बात करना पसंद नहीं करता था। इसका कारण था, सोनू का छोटी छोटी बात पर गुस्सा करना, और अपने सामने वाले को बुरा भला कहना। वह गुस्से में अपना आपा इस कदर खो बैठता, कि वह यह तक नहीं देखता कि सामने वाला उससे छोटा हैं, या बुरा।

सोनू की इस आदत से परेशान होकर उसके दादाजी जी उसे अपने पास बुलाया और उससे कहा, जब भी तुम्हे गुस्सा आये, तो एक कील ले जाना और घर के सामने लगे पेड़ में ठोक देना।

सोनू ने अपने दादाजी की बात मानी और ऐसा ही किया। उसे जब भी गुस्सा आता, वह एक कील ले जाता और घर के सामने लगे पेड़ में ठोक देता। पहले दिन उसे 20 बार गुस्सा आया, दूसरे दिन 18 बार तीसरे दिन 17 बार ऐसे करते करते उसका गुस्सा कम होने लगा।

एक दिन उसने सोचा कील ठोकने में इतनी मेहनत करनी पड़ती हैं, तो क्यों ना मैं अपने गुस्से को पूरी तरह कंट्रोल कर लू। तब मुझे कील भी ठोकनी नहीं पड़ेगी। ऐसा सोचकर उसने अपने गुस्से पे पूरी तरह से कण्ट्रोल पा लिया।

वह अपने दादाजी के पास गया, और उन्हें खुश होते हुए बताया, कि अब उसका गुस्सा खत्म हो चूका हैं। सोनू के दादाजी इस बात से बहुत खुश हुए, लेकिन उन्होंने सोनू को एक और काम दिया। उन्होंने उससे कहा, अब जो कील तुमने उस पेड़ पर ठोकी हैं, उन सभी कीलो को एक एक करके निकाल दो।

सोनू उन सभी कीलो को निकालकर खुश होकर अपने दादाजी के पास आया और कहा, दादा जी मैंने सारी किले निकाल दी।

सोनू के दादाजी उसका हाथ पकड़कर उस पेड़ के पास ले गये, और बोले अब इस पेड़ को ध्यान से देखो। इस पेड़ पर हुए छेड़ो को देखो। क्या ये पेड़ अब पहले जैसा हो पायेगा ?

सोनू ने जब उस पेड़ के तने को ध्यान से देखा तब उसकी आँखो से आंसू निकल आये। तब दादाजी ने उसे समझाया, तुम भी जब गुस्से में दुसरो को कड़वी बाते कहते हो, तब उन लोगो के दिलो में भी कुछ इसी तरह के ज़ख्म बन जाते हैं, ये ज़ख्म भर तो जाते हैं, लेकिन इनके भरने के बाद भी इंसान पहले जैसा नहीं बन पाता।

दोस्तों हम गुस्से में जाने अनजाने में अपने से सामने वालो को बहुत सी बाते बोल देते हैं, जिसके कारण सामने वाले का दिल बहुत दुखता हैं। हम गुस्से में तो यह सब देख नहीं पाते, लेकिन जब हमारा गुस्सा ठंडा होता हैं, तब हमे खुद इस बात का दुःख होता हैं, कि हमने इतना गलत क्यों बोला। लेकिन तब दुखी होने का कोई फ़ायदा नहीं होता।

इसीलिये दोस्तों हमें किसी को कुछ भी कहने से पहले सोच समझ लेना चाहिए, और अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए। गुस्सा विनाश का संकेत हैं, और कुछ नहीं।

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